बावरा बिछड़ा पराये देस
बावरा बिछड़ा पराये देस आनन् धीरज धारण , अन्तर्निहित सघन कलेस बावरा बिछड़ा पराये देस . क्षण क्षण हँसे , भरमाये , मुस्काये छल जाए , चक्षु जल , गुप्त संदेस बावरा बिछड़ा पराये देस . रंग चोखा , गाढ़ा , स्वयं का फीकी बहार हर बयार , भली चढ़ा भेस पे भेस बावरा बिछड़ा पराये देस . मौन की भाषा न लिखित न कथित भांपे जो हो हरस , ना जानो , नहीं खेद बावरा बिछड़ा पराये देस . छलिया घाना भोला है ना काहू से दोस्ती , ना काहू से द्वेष बावरा बिछड़ा पराये देस ||